तुलसी को देवी के रूप में पूजा जाता है और उन्हें भगवान विष्णु की प्रिया माना जाता है। मान्यता है कि घर में तुलसी का पौधा होने से पवित्रता, अच्छा स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि आती है। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल का होना अनिवार्य माना गया है।
तुलसी पवित्र क्यों है
तुलसी को माँ लक्ष्मी/वृंदा का स्वरूप माना जाता है और वे भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी दल के बिना उनका भोग कभी पूरा नहीं होता। भक्ति के अलावा आयुर्वेद में भी तुलसी को उसके औषधीय गुणों के लिए बहुत महत्व दिया गया है। यही कारण है कि लगभग हर पारंपरिक आँगन में तुलसी का चौरा (वृंदावन) होता है।
तुलसी कहाँ रखें और रोज़ देखभाल कैसे करें
- तुलसी को उत्तर, पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में रखें। बेहतर हो कि आँगन या बालकनी में इसे ऊँचे गमले या तुलसी चौरे में लगाएँ।
- सुबह के समय तुलसी में जल दें। जल अर्पित करें और उसके पास दीपक जलाएँ, खासकर संध्या के समय।
- परंपरा के अनुसार रविवार, एकादशी और सूर्यास्त के बाद तुलसी के पत्ते न तोड़ें।
- तुलसी के आसपास की जगह साफ़ रखें और ध्यान रखें कि देखभाल की कमी से पौधा कभी सूखने न पाए।
तुलसी की रोज़ की पूजा
बहुत से लोग हर शाम तुलसी के पास दीया जलाते हैं और छोटी-सी प्रार्थना करते हुए उनकी परिक्रमा करते हैं। महिलाएँ अक्सर परिवार की सुख-शांति और कुशलता के लिए तुलसी की पूजा करती हैं। रोज़ सुबह तुलसी में जल चढ़ाना सबसे सरल और सबसे प्रिय दैनिक नियमों में से एक है।
तुलसी विवाह
देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु (शालिग्राम रूप) के साथ विधि-विधान से कराया जाता है, जिसे तुलसी विवाह कहते हैं। परंपरा से इसी दिन से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू माने जाते हैं। यह एक आनंदमय अनुष्ठान है, जिसे बहुत से घरों और मंदिरों में धूमधाम से मनाया जाता है।
