रुद्राक्ष को 'रुद्र (भगवान शिव) के आँसू' कहा जाता है। ये ऐसे बीज हैं जिन्हें आध्यात्मिक उन्नति, मन की शांति और सुरक्षा के लिए धारण किया जाता है। हर रुद्राक्ष पर प्राकृतिक रूप से कुछ धारियाँ या मुख होते हैं, जिन्हें मुखी कहते हैं। इनकी संख्या 1 से 21 तक होती है, और हर मुखी का अपना विशेष गुण तथा अपना स्वामी ग्रह या देवता होता है।
प्रचलित मुखी और उनका अर्थ
| मुखी | संबंधित देवता / ग्रह | माना जाता है कि इनमें सहायक है |
|---|---|---|
| 1 मुखी | भगवान शिव / सूर्य | एकाग्रता, वैराग्य, आध्यात्मिक उन्नति |
| 2 मुखी | अर्धनारीश्वर / चंद्रमा | सामंजस्य, रिश्ते, भावनात्मक संतुलन |
| 5 मुखी | कालाग्नि रुद्र / गुरु (बृहस्पति) | शांति, स्वास्थ्य; यह सबसे अधिक मिलने वाला रुद्राक्ष है और सभी के लिए अच्छा है |
| 6 मुखी | भगवान कार्तिकेय / शुक्र | इच्छाशक्ति, विद्या, अभिव्यक्ति |
| 7 मुखी | माँ लक्ष्मी / शनि | समृद्धि, शनि से जुड़ी परेशानियों से राहत |
| गौरी शंकर | शिव-पार्वती | मिलन, दांपत्य जीवन में सामंजस्य |
रुद्राक्ष कैसे धारण करें और इसकी देखभाल कैसे करें
- नए रुद्राक्ष को जल या दूध से शुद्ध करें और 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र से इसे अभिमंत्रित करें।
- इसे लाल या काले धागे में, या सोने/चाँदी में जड़वाकर पहनें। अच्छा यह है कि सोमवार के दिन स्नान के बाद धारण करें।
- इसे साफ़ रखें, समय-समय पर थोड़ा तेल लगाते रहें, और परंपरा के अनुसार बहुत अशुद्ध कार्यों से पहले इसे उतार दें।
- 5 मुखी रुद्राक्ष लगभग सभी के लिए सुरक्षित और लाभकारी माना जाता है।
एक ज़रूरी सावधानी
असली और प्राकृतिक रुद्राक्ष किसी भरोसेमंद स्रोत से ही खरीदें, क्योंकि नकली रुद्राक्ष बहुत मिलते हैं। कुछ परंपराओं में रुद्राक्ष धारण करते समय पवित्रता से जुड़े कुछ नियम मानने की सलाह दी जाती है। अगर आपको यह तय करने में संदेह हो कि कौन-सी मुखी आपके लिए उपयुक्त है, तो केवल कीमत देखकर चुनने के बजाय किसी जानकार मार्गदर्शक से पूछें।
ॐ नमः शिवाय॥
Om Namah Shivaya.
रुद्राक्ष को अभिमंत्रित करने और धारण करने के लिए जपा जाने वाला मंत्र, जिससे भगवान शिव का आवाहन किया जाता है।
