वैदिक ज्योतिष में नौ ग्रहों में से हर ग्रह का एक रत्न माना गया है। मान्यता है कि यह रत्न उस ग्रह के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है। सही रत्न पहनना एक प्रचलित उपाय है, लेकिन गलत रत्न नुकसान भी पहुँचा सकता है। इसलिए किसी जानकार की सलाह के बिना रत्न कभी नहीं पहनना चाहिए।
नौ रत्न
| ग्रह | रत्न | उंगली | दिन |
|---|---|---|---|
| सूर्य | माणिक्य (रूबी) | अनामिका | रविवार |
| चंद्रमा | मोती | कनिष्ठा | सोमवार |
| मंगल | लाल मूंगा | अनामिका | मंगलवार |
| बुध | पन्ना | कनिष्ठा | बुधवार |
| गुरु (बृहस्पति) | पीला पुखराज | तर्जनी | गुरुवार |
| शुक्र | हीरा | मध्यमा/अनामिका | शुक्रवार |
| शनि | नीलम | मध्यमा | शनिवार |
| राहु | गोमेद | मध्यमा | शनिवार |
| केतु | लहसुनिया (कैट्स आई) | मध्यमा | बुधवार |
पारंपरिक रूप से रत्न कैसे धारण किए जाते हैं
- रत्न को बताई गई धातु में जड़वाया जाता है, जैसे गुरु और सूर्य के लिए सोना, चंद्रमा और शुक्र के लिए चाँदी आदि।
- इसे बताई गई उंगली में, निर्धारित दिन, सूर्योदय के बाद पहना जाता है।
- पहनने से पहले रत्न को अभिमंत्रित किया जाता है: उसे कच्चे दूध और गंगाजल से शुद्ध करके संबंधित ग्रह के मंत्र से सिद्ध किया जाता है।
- रत्न प्राकृतिक और बिना ट्रीटमेंट वाला हो, और उसका वज़न (कैरेट) उतना हो जितना सलाह में बताया गया हो।
एक गंभीर सावधानी
रत्न शक्तिशाली होते हैं और हर व्यक्ति पर अलग असर करते हैं। खासकर नीलम और हीरा बहुत जल्दी असर दिखा सकते हैं, इसलिए कुंडली का ठीक से विश्लेषण कराए बिना इन्हें आज़माने के तौर पर कभी नहीं पहना जाता। जो रत्न एक कुंडली के लिए लाभकारी है, वही दूसरी कुंडली के लिए हानिकारक हो सकता है। कोई भी रत्न खरीदने या पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी से सलाह ज़रूर लें।
