नवग्रह शांति पूजा नौ ग्रहों का आशीर्वाद पाने और किसी कष्टदायक ग्रह-दशा के प्रभाव को कम करने के लिए की जाती है। यह पूजा अक्सर किसी बड़े शुभ कार्य से पहले की जाती है, या कुंडली देखने के बाद उपाय के रूप में बताई जाती है।
ग्रहों की स्थापना का क्रम
परंपरा के अनुसार नौ ग्रहों को एक निश्चित चौकोर क्रम में स्थापित किया जाता है, जिसमें सूर्य बीच में होते हैं और हर ग्रह अपनी तय दिशा में रहता है। हर ग्रह का अपना रंग, अनाज, धातु और अर्पण होता है, और हर ग्रह का आह्वान उसके अपने मंत्र से किया जाता है। नवग्रह मंदिरों में भी यही क्रम रखा जाता है, ताकि भक्त उनकी परिक्रमा कर सकें।
ग्रहों के रंग और अर्पण
| ग्रह | रंग | अनाज / अर्पण |
|---|---|---|
| सूर्य | लाल | गेहूँ |
| चंद्रमा | सफ़ेद | चावल |
| मंगल | लाल | अरहर (तूर) / मसूर दाल |
| बुध | हरा | हरी मूँग |
| गुरु (बृहस्पति) | पीला | चने की दाल / चना |
| शुक्र | सफ़ेद | सफ़ेद सेम / चावल |
| शनि | काला/नीला | काले तिल / उड़द |
| राहु | धुएँ जैसा (धूम्र) | उड़द (काली उड़द) |
| केतु | बहुरंगी | कुलथी |
पूजा की विधि
- 1सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर एक-एक करके हर ग्रह का उसके रंग, अनाज और मंत्र के साथ आह्वान करें।
- 2हर ग्रह को फूल, अक्षत और दीपक अर्पित करें और उसकी कृपा व शुभ प्रभाव के लिए प्रार्थना करें।
- 3नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें या हर ग्रह के बीज मंत्र का बताई गई संख्या में जाप करें।
- 4अंत में आरती करें और जो ग्रह पीड़ित हो, उससे जुड़ी वस्तुओं का दान करें।
