विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा लगभग हर हिंदू अनुष्ठान में सबसे पहले की जाती है। मान्यता है कि कोई भी नया काम, यात्रा या पूजा उनके आशीर्वाद से शुरू करने पर आगे की राह की बाधाएँ दूर हो जाती हैं। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं कि घर में मौजूद रोज़मर्रा की चीज़ों से गणेश जी की संपूर्ण पूजा कैसे करें।
सबसे पहले गणेश जी की पूजा का महत्व
गणेश जी शुभ आरंभ के देवता हैं और बुद्धि व विवेक के अधिपति माने जाते हैं। गृह प्रवेश, विवाह, परीक्षा, नए व्यापार की शुरुआत और अन्य पूजाओं से पहले भक्त 'श्री गणेशाय नमः' कहकर उनका आवाहन करते हैं, ताकि काम बिना किसी रुकावट के पूरा हो। बुधवार और चतुर्थी तिथि (पक्ष का चौथा दिन) उनकी पूजा के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।
पूजा का सबसे अच्छा दिन और समय
- दिन: बुधवार और हर चतुर्थी तिथि (पक्ष का चौथा दिन)। गणेश चतुर्थी उनका सबसे बड़ा पर्व है।
- समय: सुबह स्नान के बाद, या शाम की संध्या के समय। ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 90 मिनट पहले) सबसे उत्तम है।
- दिशा: पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। मूर्ति इस तरह रखें कि उसका मुख पश्चिम या पूर्व की ओर हो।
पूजा सामग्री
पूजा सामग्री
- गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर
- ताज़ी दूर्वा घास (21 दूर्वा), जो गणेश जी को सबसे प्रिय है
- लाल फूल, विशेषकर गुड़हल, और एक लाल कपड़ा
- मोदक या लड्डू (उनकी सबसे पसंदीदा मिठाई)
- रोली/कुमकुम, अक्षत (साबुत चावल), चंदन
- घी का दीपक, अगरबत्ती और कपूर
- कलश या जल से भरा छोटा लोटा, और घंटी
पूजा की क्रमवार विधि
- 1स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पूजा स्थान साफ़ करें और मूर्ति के लिए लाल कपड़ा बिछाएँ।
- 2दीपक और अगरबत्ती जलाएँ। शुद्धि के लिए मूर्ति के चारों ओर और अपने ऊपर थोड़ा जल छिड़कें (आचमन)।
- 3हाथ जोड़कर 'ॐ गं गणपतये नमः' का जाप करते हुए गणेश जी का आवाहन करें। एक सम्मानित अतिथि की तरह उनका स्वागत करें।
- 4मूर्ति पर कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएँ और अक्षत चढ़ाएँ।
- 5उनके चरणों में 21 दूर्वा और लाल फूल अर्पित करें।
- 6मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ और साथ में फल भी चढ़ाएँ। पहले धूप दिखाएँ, फिर घी के दीपक को घड़ी की सुई की दिशा में गोल घुमाते हुए आरती करें।
- 7उनके मंत्र का 11 या 21 बार जाप करें, फिर गणेश जी की आरती 'जय गणेश जय गणेश देवा' गाएँ।
- 8हाथ जोड़कर पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें।
मंत्र
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha, Nirvighnam Kuru Me Deva Sarvakaryeshu Sarvada.
हे घुमावदार सूँड और विशाल शरीर वाले प्रभु, जिनका तेज करोड़ों सूर्यों के समान है, कृपया मेरे सभी कार्यों को सदा बाधाओं से मुक्त रखें।
दूर्वा और मोदक ही क्यों?
दूर्वा विषम संख्या में (आमतौर पर 21) चढ़ाई जाती है। कहा जाता है कि यह गणेश जी की ऊर्जा को शीतल करती है और उन्हें किसी भी महँगे चढ़ावे से ज़्यादा प्रसन्न करती है। मोदक एक मीठा पकवान है, जो आध्यात्मिक ज्ञान के फल का प्रतीक है, यानी भीतर से मीठा। पूजा कितनी बड़ी है, इससे कहीं ज़्यादा मायने यह रखता है कि ये चीज़ें श्रद्धा से अर्पित की जाएँ।
