भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार और रक्षक हैं। नारायण, सत्यनारायण, राम और कृष्ण सहित उनके अनेक रूपों की पूजा की जाती है। गुरुवार का दिन उन्हें समर्पित है और उनकी पूजा में तुलसी दल अवश्य होना चाहिए। उनकी पूजा रक्षा, स्थिरता और सत्य के लिए की जाने वाली प्रार्थना है।
धर्म के पालनहार
भगवान विष्णु सृष्टि की व्यवस्था को बनाए रखते हैं। जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब वे अवतार लेकर धरती पर आते हैं। उन्हें क्षीरसागर में शेषनाग पर विश्राम करते हुए दिखाया जाता है और उनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म (कमल) होते हैं। उनकी पूजा से मन को स्थिरता मिलती है, सुरक्षा का भाव जागता है और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
सबसे शुभ दिन और समय
- दिन: गुरुवार और हर एकादशी। सत्यनारायण पूजा पूर्णिमा या किसी शुभ दिन की जाती है।
- समय: सुबह स्नान के बाद, या शाम को सत्यनारायण कथा के समय।
- दिशा: पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा करें।
पूजा सामग्री
पूजा सामग्री
- भगवान विष्णु (या सत्यनारायण भगवान) की प्रतिमा या चित्र
- तुलसी दल, जो विष्णु पूजा में अनिवार्य है
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) और फल
- पीले फूल और पीला वस्त्र (पीला रंग उन्हें सबसे प्रिय है)
- चंदन, कुमकुम, अक्षत और पीला धागा (कलावा)
- घी का दीपक, धूप, कपूर और उपलब्ध हो तो शंख
- सत्यनारायण पूजा के भोग के लिए पंजीरी या सूजी का हलवा
चरण-दर-चरण पूजा विधि
- 1स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें, हो सके तो पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थान को साफ़ करें और प्रतिमा को पीले कपड़े पर स्थापित करें।
- 2सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' बोलकर भगवान विष्णु का आवाहन करें।
- 3प्रतिमा को पहले पंचामृत से, फिर साफ़ जल से स्नान कराएँ और धीरे से पोंछ दें।
- 4चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएँ, फिर अक्षत और पीले फूल चढ़ाएँ।
- 5भगवान के चरणों में तुलसी दल अर्पित करें। भोग पर भी तुलसी रखें, क्योंकि भगवान विष्णु तुलसी के बिना भोग स्वीकार नहीं करते।
- 6पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाएँ। धूप और दीपक जलाकर आरती करें।
- 7विष्णु मंत्र का 108 बार जाप करें। सत्यनारायण पूजा हो तो परिवार के साथ बैठकर कथा पढ़ें।
- 8'ॐ जय जगदीश हरे' आरती गाएँ, भूल-चूक के लिए क्षमा माँगें और प्रसाद बाँटें।
मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय॥
Om Namo Bhagavate Vasudevaya.
मैं सर्वव्यापी परमात्मा भगवान वासुदेव (विष्णु) को नमन करता हूँ। बारह अक्षरों वाला यह मंत्र (द्वादशाक्षर मंत्र) विष्णु भक्ति का मूल मंत्र है।
सत्यनारायण कथा
कई परिवार पूर्णिमा, गृह प्रवेश, विवाह और किसी सफलता के अवसर पर भगवान का धन्यवाद करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए सत्यनारायण पूजा करते हैं। इसमें सत्यनारायण कथा के पाँच अध्याय पढ़े जाते हैं, पंजीरी या सूजी के हलवे का प्रसाद चढ़ाया जाता है और फिर उसे वहाँ उपस्थित सभी लोगों में बाँटा जाता है। यह कथा सिखाती है कि अपने वचन का पालन करने और ईश्वर का सम्मान करने से स्थायी सौभाग्य मिलता है।
