माँ लक्ष्मी धन, सौभाग्य, समृद्धि और सौंदर्य की देवी हैं। उनकी पूजा भौतिक सुख-संपन्नता और आध्यात्मिक समृद्धि, दोनों के लिए की जाती है। शुक्रवार और दीवाली उनके सबसे खास अवसर हैं, लेकिन माना जाता है कि घर पर हर सप्ताह सच्चे मन से की गई पूजा से उनकी कृपा सदा बनी रहती है।
माँ लक्ष्मी कौन हैं?
माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं और 'श्री' का साक्षात् स्वरूप हैं, यानी हर रूप में शुभता और संपन्नता। उन्हें कमल पर विराजमान और हाथों में कमल लिए दिखाया जाता है। उनके हाथ से सोने के सिक्के बरसते हैं और उनके दोनों ओर दो हाथी होते हैं। लक्ष्मी जी की सच्ची उपासना केवल धन की कामना नहीं, बल्कि धर्मपूर्ण समृद्धि की कामना है: ऐसा धन जो ईमानदारी से कमाया जाए और सही कामों में लगाया जाए।
पूजा का उत्तम दिन और समय
- दिन: शुक्रवार माँ लक्ष्मी को समर्पित है। दीवाली (कार्तिक अमावस्या) उनकी पूजा का सबसे बड़ा पर्व है।
- समय: शाम को, गोधूलि बेला (प्रदोष काल) में दीपक जलाने के बाद। दीवाली पर सूर्यास्त के बाद पूजा करें।
- दिशा: पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) की ओर मुख करके बैठें। पूजा स्थान को एकदम साफ़-सुथरा रखें, क्योंकि माँ लक्ष्मी को स्वच्छता प्रिय है।
पूजन सामग्री
पूजा सामग्री
- माँ लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर (अक्सर उनके साथ गणेश जी भी)
- कमल के फूल या लाल/गुलाबी फूल और एक लाल कपड़ा
- कुमकुम, हल्दी, अक्षत और चंदन
- खीर, बताशे या कोई भी सफ़ेद/पीली मिठाई, साथ में फल
- सिक्के, चाँदी की कोई छोटी वस्तु, या आपका बही-खाता
- घी या तेल के दीपक (विषम संख्या में), धूप/अगरबत्ती और कपूर
- जल से भरा कलश, जिस पर आम के पत्ते और नारियल रखा हो
पूजा की चरण-दर-चरण विधि
- 1घर की अच्छी तरह सफ़ाई करें और मुख्य द्वार व पूजा स्थान पर दीपक जलाएँ। माँ लक्ष्मी साफ़-सुथरे और रोशनी से जगमगाते घरों में प्रवेश करती हैं।
- 2स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें, फिर लाल कपड़े पर कलश स्थापित करें और गणेश जी व माँ लक्ष्मी की मूर्तियाँ रखें।
- 3सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें (ॐ गं गणपतये नमः), फिर माँ लक्ष्मी का आवाहन करें।
- 4देवी को कुमकुम, हल्दी, अक्षत और चंदन अर्पित करें। उन्हें फूलों से सजाएँ और हो सके तो सोने का छोटा-सा टुकड़ा या एक सिक्का चढ़ाएँ।
- 5भोग में खीर या मिठाई और फल अर्पित करें। धूप जलाएँ और घी के दीपक से आरती करें।
- 6हो सके तो तुलसी या कमलगट्टे की माला से लक्ष्मी मंत्र का 108 बार जाप करें।
- 7'ॐ जय लक्ष्मी माता' आरती गाएँ, फिर सुख-समृद्धि और कुशल-मंगल के लिए सच्चे मन से प्रार्थना करें।
- 8एक दीपक जलता रहने दें और प्रसाद बाँटें। दीवाली पर माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए मुख्य द्वार खुला रखें।
लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः॥
Om Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseeda Praseeda Shreem Hreem Shreem Om Mahalakshmyai Namah.
हे कमल पर विराजमान देवी, हे कमल में निवास करने वाली माँ, मुझ पर प्रसन्न होइए और अपनी कृपा, धन और शुभता बरसाइए।
रोज़ माँ लक्ष्मी को आमंत्रित करने के आसान उपाय
- अपने घर को, खासकर मुख्य द्वार और रसोई को, साफ़-सुथरा रखें और बेकार सामान जमा न होने दें।
- हर शाम गोधूलि बेला में तुलसी के पौधे के पास या मुख्य द्वार पर दीपक जलाएँ।
- पूजा स्थान या ईशान कोण (उत्तर-पूर्वी कोना) को कभी गंदा या अँधेरा न रहने दें।
- ईमानदारी और दान-पुण्य को अपनाएँ। कहा जाता है कि जहाँ धर्म का पालन होता है, वहीं माँ लक्ष्मी निवास करती हैं।
