माँ काली जगदम्बा का उग्र रूप हैं, जो बुराई, अहंकार और भय का नाश करती हैं। उनका स्वरूप भले ही प्रचंड दिखे, पर अपने भक्तों के प्रति वे अत्यंत करुणामयी हैं और उन्हें रक्षा, साहस और मोक्ष प्रदान करती हैं। बंगाल में और काली चौदस / दीपावली की रात को उनकी विशेष श्रद्धा से पूजा की जाती है।
उनके उग्र रूप का अर्थ
माँ काली का श्याम वर्ण उस अनंत, निराकार सत्य का प्रतीक है जो काल से परे है। उनकी मुंडमाला और खड्ग अहंकार और उन भ्रमों के विनाश के प्रतीक हैं जो हमें बाँधे रखते हैं। भक्त भय और नकारात्मकता को जलाकर भस्म करने और निर्भय भक्ति पाने के लिए उनकी शरण में जाते हैं।
पूजा सामग्री
पूजा सामग्री
- माँ काली की मूर्ति या चित्र
- लाल गुड़हल के फूल और लाल कपड़ा
- कुमकुम, अक्षत और चंदन
- घी या सरसों के तेल का दीपक, अगरबत्ती और कपूर
- मिठाई, फल और परंपरा के अनुसार काली पूजा की रात चढ़ाए जाने वाले विशेष भोग
पूजा विधि
- 1पूजा शाम या रात के समय करें, क्योंकि यह समय माँ काली से जुड़ा माना जाता है। पूजा स्थान को साफ करें और दीपक जलाएँ।
- 2देवी का आवाहन करें और उन्हें लाल गुड़हल, कुमकुम, अक्षत और चंदन अर्पित करें।
- 3भोग लगाएँ और घंटी बजाते हुए दीपक से आरती करें।
- 4स्थिर और निर्भय मन से उनका मंत्र जपें और रक्षा व साहस के लिए प्रार्थना करें।
ॐ क्रीं काली॥ ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥
Om Kreem Kali. Om Kreem Kalikaye Namah.
यह माँ काली का बीज मंत्र है, जो उनकी रक्षा करने वाली और अहंकार का नाश करने वाली शक्ति का आवाहन करता है।
