भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजे जाते हैं। वे ऐसे आदर्श पुरुष थे जिन्होंने हर कठिनाई में धर्म, सत्य और कर्तव्य का पालन किया। प्रायः माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के साथ राम जी की पूजा की जाती है। इससे घर में धर्म, धैर्य और भक्ति के संस्कार आते हैं।
धर्म का आदर्श
रामायण में वर्णित राम जी का जीवन सम्मान के साथ जीने की राह दिखाता है। वे एक आज्ञाकारी पुत्र, समर्पित पति, न्यायप्रिय राजा और करुणामय स्वामी थे। उनका नाम अपने आप में एक शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। 'राम नाम' ने अनगिनत भक्तों को जीवन की कठिनाइयों से पार लगाया है। उनकी पूजा सौम्य और गरिमापूर्ण होती है और उनके नाम के जप पर केंद्रित रहती है।
पूजा का शुभ दिन और समय
- दिन: कोई भी दिन, विशेषकर राम नवमी (चैत्र मास में राम जी का जन्मोत्सव) और रामायण पाठ के दिनों में।
- समय: सुबह और शाम; राम नवमी पर पूजा का सबसे खास समय दोपहर (मध्याह्न) होता है, क्योंकि यही उनके जन्म का समय है।
- दिशा: पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें।
पूजा सामग्री
पूजा सामग्री
- माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के साथ भगवान राम का चित्र या मूर्ति
- पीले फूल, तुलसी दल और पीला वस्त्र
- चंदन, कुमकुम, अक्षत और रोली
- पंचामृत, फल और मिठाई (खीर या पंजीरी)
- घी का दीपक, धूप, कपूर और घंटी
- पाठ के लिए रामचरितमानस या सुंदरकांड की पुस्तक
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
- 1स्नान करके पूजा स्थान साफ़ करें और पीले वस्त्र पर राम दरबार का चित्र स्थापित करें।
- 2सबसे पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर 'श्री राम जय राम जय जय राम' का जप करते हुए भगवान राम का आवाहन करें।
- 3चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएँ, फिर अक्षत, तुलसी और पीले फूल अर्पित करें।
- 4पंचामृत, फल और मिठाई का भोग लगाएँ और उस पर तुलसी दल रखें।
- 5दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
- 6राम मंत्र का जप करें और सुंदरकांड या रामचरितमानस की कुछ चौपाइयों का पाठ करें।
- 7राम नवमी पर व्रत रखें। दोपहर में पालना झुलाकर और भजन गाकर उनका जन्मोत्सव मनाएँ और प्रसाद बाँटें।
मंत्र
श्री राम जय राम जय जय राम॥
Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram.
भगवान राम की जय हो। यह उनके नाम का सरल और शक्तिशाली जप है, जो शांति, बल और मोक्ष प्रदान करने वाला माना जाता है।
राम नाम की महिमा
युगों-युगों से संत यही सिखाते आए हैं कि श्रद्धा से केवल 'राम' नाम दोहराना ही मन को स्थिर करने और हृदय को शुद्ध करने के लिए पर्याप्त है। सुंदरकांड हनुमान जी की भक्ति का अध्याय है। साहस पाने और कष्टों से छुटकारे के लिए मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष रूप से लोकप्रिय है।
