माँ दुर्गा उग्र भी हैं और करुणामयी भी। वे बुराई का नाश करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। नवरात्रि के नौ दिनों में, जब उनके नौ रूपों (नवदुर्गा) की आराधना होती है, उनकी विशेष श्रद्धा से पूजा की जाती है। लेकिन शक्ति और सुरक्षा के लिए घर पर किसी भी दिन उनकी पूजा की जा सकती है।
शक्ति की जननी
माँ दुर्गा सिंह पर सवार हैं और सभी देवताओं के अस्त्र-शस्त्र धारण करती हैं। जब कोई और महिषासुर राक्षस को हरा नहीं सका, तब माँ ने उसका वध किया। वे शक्ति का स्वरूप हैं, वह आदि स्त्री-शक्ति जो पूरी सृष्टि को धारण करती है। उनकी पूजा से साहस मिलता है और भय दूर होता है। माना जाता है कि इससे घर नकारात्मकता से सुरक्षित रहता है।
पूजा का शुभ दिन और समय
- दिन: नवरात्रि (साल में दो बार, चैत्र और आश्विन में), अष्टमी और नवमी; इसके अलावा कोई भी मंगलवार या शुक्रवार।
- समय: नवरात्रि में सुबह और शाम; हो सके तो पूरे नौ दिन अखंड ज्योत (लगातार जलने वाला दीपक) जलाएँ।
- दिशा: पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें; लाल कपड़ा और लाल फूल रखें, जो माँ को बहुत प्रिय हैं।
पूजा सामग्री
पूजा सामग्री
- माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर (या नवदुर्गा के सभी नौ रूप)
- स्थापना के लिए जल, आम के पत्ते और नारियल वाला कलश
- पूरा अनुष्ठान कर रहे हों तो मिट्टी में बोए हुए जौ (जयंती/खेतरी के लिए)
- लाल फूल (गुड़हल), लाल चुनरी, कुमकुम, और लाल चूड़ी-बिंदी का सेट
- अक्षत, चंदन, अखंड ज्योत के लिए घी, धूप-अगरबत्ती और कपूर
- अष्टमी/नवमी के भोग के लिए फल, हलवा, पूरी और काले चने
- जाप के लिए लाल माला और घंटी
नवरात्रि पूजा की क्रमवार विधि
- 1पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना (घटस्थापना) करें और जौ बोएँ। अखंड ज्योत जलाएँ।
- 2हर सुबह स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर माँ दुर्गा का आवाहन करें।
- 3रोज़ माँ को लाल चुनरी, कुमकुम, फूल और अक्षत अर्पित करें।
- 4भोग लगाएँ: रोज़ फल और मिठाई, और अष्टमी/नवमी पर विशेष पकवान। सुबह-शाम आरती करें।
- 5दुर्गा मंत्र का जाप करें और हो सके तो दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
- 6अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन करें। छोटी कन्याओं को देवी का रूप मानकर आमंत्रित करें, उनके पैर धोएँ, और उन्हें पूरी, हलवा और चने खिलाएँ।
- 7अंतिम दिन माँ का धन्यवाद करते हुए पूजा का समापन करें, और बोए हुए जौ के अंकुरों का विसर्जन करें या उन्हें आदर से संभालकर रखें।
मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
Om Aim Hreem Kleem Chamundaye Vichche.
यह नवार्ण मंत्र है। इसमें देवी के महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती रूपों का आवाहन किया जाता है, जो ज्ञान, धन और सुरक्षा प्रदान करते हैं।
नवरात्रि के नौ रूप
नवरात्रि का हर दिन माँ दुर्गा के एक रूप को समर्पित है: शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। बहुत से भक्त हर दिन उस दिन से जुड़े रंग के कपड़े पहनते हैं और उस दिन का प्रिय भोग चढ़ाते हैं। इससे साहस से पूर्णता तक की नौ दिनों की यह यात्रा और गहरी हो जाती है।
