श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार भरे रिश्ते का त्योहार है। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी (पवित्र धागा) बाँधकर उसकी कुशलता की कामना करती है, और भाई उसकी रक्षा करने का वचन देता है। 'रक्षा' का अर्थ है सुरक्षा और 'बंधन' का अर्थ है डोर या रिश्ता।
सही मुहूर्त
राखी शुभ मुहूर्त में ही बाँधनी चाहिए और भद्रा काल से बचना चाहिए, क्योंकि इस काल को राखी बाँधने के लिए अशुभ माना जाता है। परंपरा से दोपहर का समय (अपराह्न) सबसे अच्छा माना जाता है। उस वर्ष भद्रा का समय जानने के लिए पंचांग ज़रूर देख लें।
पूजा की थाली
पूजा सामग्री
- राखी (पवित्र धागा)
- तिलक के लिए रोली/कुमकुम और अक्षत
- आरती के लिए दीया
- मिठाई और एक छोटा-सा उपहार
पूजा-विधि, क्रम से
- 1बहन थाली सजाती है और चाहे तो पहले कुलदेवता की छोटी-सी प्रार्थना कर लेती है।
- 2वह भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाती है और उसकी छोटी-सी आरती उतारती है।
- 3फिर वह भाई की दाईं कलाई पर राखी बाँधती है और उसके अच्छे स्वास्थ्य, सुख और लंबी उम्र की कामना करती है।
- 4दोनों एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं, और भाई उपहार देकर बहन की रक्षा करने और हर हाल में साथ देने का वचन देता है।
राखी केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं है। जहाँ भी रक्षा और स्नेह का रिश्ता हो, वहाँ राखी बाँधी जाती है। यह जानकारी सांस्कृतिक समझ के लिए है; रीति-रिवाज और तिथियाँ अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं।
ध्यान दें: यह लेख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। पूजा-पाठ की परंपराएँ क्षेत्र, समाज और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने बड़ों या कुल पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें। अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सलाह के लिए आप AI AstroCall पर ज्योतिषी से बात कर सकते हैं। हमारा अस्वीकरण देखें।
