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त्योहार और व्रत28 जुलाई 2026 · 6 मिनट

घर पर गणेश चतुर्थी कैसे मनाएँ: स्थापना से विसर्जन तक

इस गणेश चतुर्थी बप्पा को घर लाएँ। जानिए प्राण प्रतिष्ठा, रोज़ की पूजा और भोग, मोदक का प्रसाद, और श्रद्धा के साथ पर्यावरण के अनुकूल विसर्जन कैसे करें।

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गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म का पर्व है। परिवार डेढ़, तीन, पाँच, सात या दस दिनों के लिए घर में मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करते हैं, रोज़ उनकी पूजा करते हैं और अंत में विसर्जन करके बप्पा को विदा करते हैं। विदाई के समय सब यही प्रार्थना करते हैं: 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ'।

प्रतिमा की स्थापना

  1. 1पर्यावरण के अनुकूल शाडू मिट्टी की प्रतिमा चुनें। एक चौकी को साफ़ करके उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएँ और उसे सजाएँ।
  2. 2चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त में प्रतिमा को पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके रखें और मंत्रों के साथ प्राण प्रतिष्ठा करें, यानी प्रतिमा में प्राणों का आवाहन करें।
  3. 3षोडशोपचार पूजा करें। इसमें जल, फूल, दूर्वा, चंदन, धूप और दीप सहित सोलह उपचार अर्पित किए जाते हैं।
  4. 421 दूर्वा और मोदक अर्पित करें, फिर आरती करें।

उत्सव के दिनों में रोज़ की पूजा

  • दिन में दो बार, सुबह और शाम, आरती करें और ताज़े मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ।
  • हर दिन 21 दूर्वा अर्पित करें। फूल और दीपक भी रोज़ ताज़े रखें।
  • परिवार के साथ मिलकर 'सुखकर्ता दुखहर्ता' आरती गाएँ और गणेश जी के मंत्रों का जाप करें।
मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः॥

Om Gam Ganapataye Namah.

यह गणेश जी का बीज मंत्र है, जिससे विघ्नहर्ता का आवाहन किया जाता है।

विसर्जन (विदाई)

अंतिम दिन आख़िरी आरती करें, बप्पा का धन्यवाद करें और पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा माँगें। इसे उत्तर पूजा कहते हैं। इसके बाद प्रतिमा का श्रद्धा से विसर्जन करें। हो सके तो घर पर ही बाल्टी या टब में, या पर्यावरण के अनुकूल तय किए गए विसर्जन स्थल पर विसर्जन करें। हमारी नदियों और झीलों को बचाने के लिए प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा का ही उपयोग करें।

मिट्टी की प्रतिमा और प्राकृतिक रंग चुनने से त्योहार की ख़ुशी भी बनी रहती है और पर्यावरण का भी ध्यान रहता है। यह जानकारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समझ के लिए है। अलग-अलग क्षेत्रों में रीति-रिवाज़ अलग हो सकते हैं।
ध्यान दें: यह लेख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। पूजा-पाठ की परंपराएँ क्षेत्र, समाज और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने बड़ों या कुल पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें। अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सलाह के लिए आप AI AstroCall पर ज्योतिषी से बात कर सकते हैं। हमारा अस्वीकरण देखें।

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