महाशिवरात्रि, यानी 'शिव की महान रात्रि', फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात को आती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागते हैं और चार प्रहरों (रात के चार भागों) में अभिषेक, बेलपत्र और लगातार 'ॐ नमः शिवाय' के जाप के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं।
व्रत
- सूर्योदय के समय संकल्प लेकर व्रत शुरू करें। बहुत से लोग निर्जला (बिना पानी का) या फलाहार (केवल फल वाला) व्रत रखते हैं।
- अनाज, प्याज और लहसुन से परहेज़ करें; ज़रूरत हो तो फल, दूध और व्रत में खाई जाने वाली चीज़ें लें।
- रात की पूजा और सूर्योदय के बाद अगली सुबह व्रत खोलें।
चार प्रहर की पूजा
रात को चार प्रहरों में बाँटा जाता है और हर प्रहर में भगवान शिव का अलग-अलग चीज़ से अभिषेक किया जाता है: पहले प्रहर में जल, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद। हर अभिषेक के बाद बेलपत्र, सफ़ेद फूल चढ़ाए जाते हैं और मंत्र का जाप किया जाता है। रात भर जागना और जाप करना ही इस व्रत का मूल है।
अभिषेक की सामग्री
पूजा सामग्री
- जलधारी (पानी निकलने वाली थाली) पर स्थापित शिवलिंग
- जल और गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी और शहद
- तीन पत्तियों वाले बेलपत्र, सफ़ेद फूल और धतूरा
- चंदन, भस्म (विभूति) और अक्षत
- घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती और कपूर
ॐ नमः शिवाय॥
Om Namah Shivaya.
पंचाक्षरी मंत्र, जिसका अर्थ है 'मैं शिव को नमन करता हूँ'। शिवरात्रि की पूरी रात इसका जाप किया जाता है।
