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त्योहार और व्रत26 जुलाई 2026 · 6 मिनट

महाशिवरात्रि व्रत कैसे रखें और रात भर पूजा कैसे करें

भगवान शिव की महान रात्रि का पालन करें: व्रत के नियम, रात भर चलने वाली चार प्रहर की पूजा, अभिषेक की सामग्री और वे मंत्र जो महाशिवरात्रि को शक्तिशाली बनाते हैं।

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महाशिवरात्रि, यानी 'शिव की महान रात्रि', फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी की रात को आती है। इस दिन भक्त व्रत रखते हैं, रात भर जागते हैं और चार प्रहरों (रात के चार भागों) में अभिषेक, बेलपत्र और लगातार 'ॐ नमः शिवाय' के जाप के साथ भगवान शिव की पूजा करते हैं।

व्रत

  • सूर्योदय के समय संकल्प लेकर व्रत शुरू करें। बहुत से लोग निर्जला (बिना पानी का) या फलाहार (केवल फल वाला) व्रत रखते हैं।
  • अनाज, प्याज और लहसुन से परहेज़ करें; ज़रूरत हो तो फल, दूध और व्रत में खाई जाने वाली चीज़ें लें।
  • रात की पूजा और सूर्योदय के बाद अगली सुबह व्रत खोलें।

चार प्रहर की पूजा

रात को चार प्रहरों में बाँटा जाता है और हर प्रहर में भगवान शिव का अलग-अलग चीज़ से अभिषेक किया जाता है: पहले प्रहर में जल, दूसरे में दही, तीसरे में घी और चौथे में शहद। हर अभिषेक के बाद बेलपत्र, सफ़ेद फूल चढ़ाए जाते हैं और मंत्र का जाप किया जाता है। रात भर जागना और जाप करना ही इस व्रत का मूल है।

अभिषेक की सामग्री

पूजा सामग्री

  • जलधारी (पानी निकलने वाली थाली) पर स्थापित शिवलिंग
  • जल और गंगाजल, कच्चा दूध, दही, घी और शहद
  • तीन पत्तियों वाले बेलपत्र, सफ़ेद फूल और धतूरा
  • चंदन, भस्म (विभूति) और अक्षत
  • घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती और कपूर
मंत्र

ॐ नमः शिवाय॥

Om Namah Shivaya.

पंचाक्षरी मंत्र, जिसका अर्थ है 'मैं शिव को नमन करता हूँ'। शिवरात्रि की पूरी रात इसका जाप किया जाता है।

व्रत अपनी सेहत की सीमा में रहकर ही रखें, और अगर आपके लिए निर्जला व्रत उचित नहीं है तो पानी पीते रहें। यह मार्गदर्शिका सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है।
ध्यान दें: यह लेख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। पूजा-पाठ की परंपराएँ क्षेत्र, समाज और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने बड़ों या कुल पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें। अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सलाह के लिए आप AI AstroCall पर ज्योतिषी से बात कर सकते हैं। हमारा अस्वीकरण देखें।

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