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ज्योतिष की मूल बातें14 जून 2026 · 6 मिनट

पंचांग को समझें: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार

पंचांग हिंदू कैलेंडर है, जिससे शुभ समय देखा जाता है। जानिए इसके पाँच अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण) और साथ ही राहुकाल और शुभ मुहूर्त के बारे में।

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पंचांग (जिसका शाब्दिक अर्थ है 'पाँच अंग') पारंपरिक हिंदू कैलेंडर है। विवाह से लेकर यात्रा तक, हर काम के लिए शुभ दिन और शुभ समय इसी से देखा जाता है। इसके पाँचों अंग मिलकर बताते हैं कि कोई भी समय कैसा है।

पंचांग के पाँच अंग

  • तिथि: चंद्र मास का दिन (एक चंद्र मास में 30 तिथियाँ होती हैं), जिससे चंद्रमा की कला तय होती है।
  • वार: सप्ताह का दिन। हर वार का स्वामी एक ग्रह होता है, जैसे रविवार का सूर्य, सोमवार का चंद्रमा, और इसी तरह आगे।
  • नक्षत्र: वह नक्षत्र जिसमें उस दिन चंद्रमा स्थित होता है।
  • योग: सूर्य और चंद्रमा का एक विशेष मेल। कुल 27 योग होते हैं।
  • करण: तिथि का आधा भाग। कुल 11 करण होते हैं।

राहुकाल और अशुभ समय

पंचांग में वे समय भी दिए होते हैं जिनमें कोई नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। इनमें मुख्य हैं राहुकाल (हर दिन लगभग 90 मिनट का, जो वार के अनुसार बदलता है), यमगंड और गुलिक काल। बहुत से लोग बस इतना ध्यान रखते हैं कि राहुकाल में कोई ज़रूरी काम शुरू न करें।

शुभ मुहूर्त कैसे निकाला जाता है

शुभ मुहूर्त निकालने के लिए अनुकूल तिथि, वार, नक्षत्र और योग को एक साथ देखा जाता है और अशुभ समय को छोड़ दिया जाता है। इसीलिए विवाह, गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत किसी तय समय पर की जाती है, क्योंकि पंचांग से पता चलता है कि कब ग्रह-नक्षत्रों का 'मौसम' सबसे अधिक अनुकूल है।

आज का पंचांग, सूर्योदय, सूर्यास्त और राहुकाल आप AI AstroCall पर देख सकते हैं। यह लेख जानकारी के लिए है। बड़े आयोजनों का मुहूर्त पंडित जी या ज्योतिषी ही निकालते हैं।
ध्यान दें: यह लेख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जानकारी के लिए है। पूजा-पाठ की परंपराएँ क्षेत्र, समाज और परिवार के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने बड़ों या कुल पुरोहित के मार्गदर्शन का पालन करें। अपनी कुंडली के अनुसार व्यक्तिगत सलाह के लिए आप AI AstroCall पर ज्योतिषी से बात कर सकते हैं। हमारा अस्वीकरण देखें।

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