मुहूर्त वह शुभ समय है जिसे किसी महत्वपूर्ण काम की शुरुआत के लिए चुना जाता है, ताकि वह काम अनुकूल ग्रह-स्थितियों में आरंभ हो। विवाह हो, गृह प्रवेश हो या कोई सौदा पक्का करना हो, अच्छा मुहूर्त चुनना रोज़मर्रा के जीवन में ज्योतिष का सबसे व्यावहारिक उपयोग है।
अच्छा मुहूर्त किन बातों से बनता है
मुहूर्त पंचांग के पाँचों अंगों को मिलाकर चुना जाता है। इसके लिए शुभ तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण देखे जाते हैं, साथ ही यह ध्यान रखा जाता है कि चंद्रमा और संबंधित ग्रह अच्छी स्थिति में हों और अशुभ समय टाला जाए। चुने गए समय का लग्न भी देखा जाता है, ताकि नए काम की 'जन्म कुंडली' मज़बूत बने।
किन अवसरों पर मुहूर्त ज़रूरी होता है
- विवाह और सगाई (विवाह मुहूर्त)।
- गृह प्रवेश और मकान का निर्माण (भूमि पूजन)।
- नामकरण संस्कार, मुंडन और अन्नप्राशन (बच्चे को पहली बार अन्न खिलाना)।
- व्यापार की शुरुआत, संपत्ति या वाहन ख़रीदना और अन्य बड़ी ख़रीदारी।
किस समय से बचें
- हर दिन का राहु काल, यमगंड और गुलिक काल।
- अशुभ तिथियाँ और कुछ विशेष कामों के लिए वर्जित नक्षत्र।
- भद्रा काल (जैसे राखी बाँधने के लिए) और ग्रहण काल।
- चातुर्मास और ऐसे अन्य समय जिनमें परंपरा से विवाह नहीं किए जाते।
शुभ घड़ी कैसे चुनी जाती है
निजी आयोजनों के लिए ज्योतिषी ऐसा मुहूर्त चुनते हैं जो सबके लिए (पंचांग के अनुसार) भी शुभ हो और आपके लिए व्यक्तिगत रूप से भी, यानी आपकी अपनी कुंडली और दशा से मेल खाता हो। रोज़मर्रा के कामों के लिए बहुत से लोग बस राहु काल से बचते हैं और शुभ वार व तिथि पर काम शुरू कर देते हैं।
